कोई बम के धमाके से उड़ रहा है
कोई दौलत के जोर मैं उड़ रहा है
कोई अपने शौख मैं उड़ रहा है
कोई किसी के खौफ मैं उड़ रहा है
देख कर इंसानी फितरत खुदा भी हैरान है
यह बंदा किस और मुड़ रहा है
कोई ज़िंदगी गुजरने के लिए पी रहा है
तो कोई खुद को मारने के लिए पी रहा है
किसी के पास ज्यादा है इसलिए लुटा रहा है
किसी के पास कम है इसलिए जुटा रहा है
कोई नींद को खरीद कर सो रहा है
कोई पलभर नींद लेने को रो रहा है
कही किसी को शोहरत चूम रही है
तो कहीं किसी के आगे पीछे गुमनामी घूम रही है
कही किसी की दुनिया खुशियों से हसीन है
तो कही किसी की दुनिया एकदम ग़मगीन हैं
एक कमरे मैं कही किसी की ज़िंदगी गुज़र जाती है
तो कही महलों मैं किसी की आहट भी नहीं आती है
कही कोई किसी के प्यार से परेशान है
तो कही कोई अचानक मिली बेवफाई से हैरान है
कोई किसी के चमन को उजाड़ रहा है
तो कोई किसी की वीरानियों को सवार रहा है
शायद दुनिया का येही दस्तूर है ....
कोई गम की चादर ओढ़ के भी सो रहा है
तो किसी से ग़म भी कौसों दूर है
कहीं पे अँधेरा ज्यादा है ...तो कही पे बेंतेहा नूर है
शायद दुनिया का येही दस्तूर है ....शायद दुनिया का येही दस्तूर है ....
द्वारा रफत : 9826219196
Saturday, July 11, 2009
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