वो देखो आतंकवादी जा रहा है
दुनिया को अपने खौफ से सता रहा है
इंसानियत को बडे चाव से चबा रहा है
वो देखो आतंकवादी जा रहा है
मासूमों के खून से रोज़ नहा रहा है
अपने मज़हब की सीख को बदलता जा रहा है
माओं से बेटे, बहनों से भाई, और ग़रीब से रोटी छीनता चला जा रहा है
वो देखो आतंकवादी जा रहा है
अधजली लाशों..बिखरी इमारतों और अनाथ बच्चों के सवालों से कतरा रहा है
खुदा का नाम ले कर खुदा से ही दूर होता जा रहा है
अपनी कायरता को बहादुरी बतला कर इतरा रहा है
वो देखो आतंकवादी जा रहा है
कभी तू भी मासूम था कभी तेरे सीने मैं भी दिल था कभी तू भी इंसान था
अब क्यों हैवान बनता जा रहा है
शायद तू भूल गया है तेरी भी मा है,तेरी भी बेहेन है , तू भी किसी का बेटा है
अपने कामों से क्यों उन्हें शर्मसार करता जा रहा है
वो देखो आतंकवादी जा रहा है
बहाए हुए खून के एक एक कतरे का जवाब देना होगा
तेरे कर्मों का तुझे हिसाब देना होगा
क्यों तू यह भूलता जा रहा है
वो देखो आतंकवादी जा रहा है
याद रख तेरे ज़ुल्मों की ताक़त हमरे होंसलों से बहुत कम है
तेरे आकाओं को पलभर मैं खाकसार करने का हम मैं दम है
समझ जाओ...बडे प्यार से एक हिन्दुस्तानी तुमको समझा रहा है
वो देखो आतंकवादी जा रहा है
द्वारा रफत : 9826219196
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8 comments:
hehehe... neeche label dekho kya lagaya hai... Rafat, Terrorist ;-)
neway great poem buddy... communicates the message across.
Wah Rafat bhai...bhout shandaar kavita hai.. ek dam dard ko udhel dia hai.. bhout khoob
Kya baat hain Rafat,
Jai Hind.....
Good Rafat, Keep it up...
Chacha Kya Jazba dikha rahe ho
Good Keep it UP.
Wah wah
Kya bat hai Master Ji
sahi hia guru dev
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