Friday, November 28, 2008

Mumbai Terrorists

वो देखो आतंकवादी जा रहा है
दुनिया को अपने खौफ से सता रहा है
इंसानियत को बडे चाव से चबा रहा है
वो देखो आतंकवादी जा रहा है

मासूमों के खून से रोज़ नहा रहा है
अपने मज़हब की सीख को बदलता जा रहा है
माओं से बेटे, बहनों से भाई, और ग़रीब से रोटी छीनता चला जा रहा है
वो देखो आतंकवादी जा रहा है

अधजली लाशों..बिखरी इमारतों और अनाथ बच्चों के सवालों से कतरा रहा है
खुदा का नाम ले कर खुदा से ही दूर होता जा रहा है
अपनी कायरता को बहादुरी बतला कर इतरा रहा है
वो देखो आतंकवादी जा रहा है

कभी तू भी मासूम था कभी तेरे सीने मैं भी दिल था कभी तू भी इंसान था
अब क्यों हैवान बनता जा रहा है
शायद तू भूल गया है तेरी भी मा है,तेरी भी बेहेन है , तू भी किसी का बेटा है
अपने कामों से क्यों उन्हें शर्मसार करता जा रहा है
वो देखो आतंकवादी जा रहा है

बहाए हुए खून के एक एक कतरे का जवाब देना होगा
तेरे कर्मों का तुझे हिसाब देना होगा
क्यों तू यह भूलता जा रहा है
वो देखो आतंकवादी जा रहा है

याद रख तेरे ज़ुल्मों की ताक़त हमरे होंसलों से बहुत कम है
तेरे आकाओं को पलभर मैं खाकसार करने का हम मैं दम है
समझ जाओ...बडे प्यार से एक हिन्दुस्तानी तुमको समझा रहा है
वो देखो आतंकवादी जा रहा है

द्वारा रफत : 9826219196

8 comments:

NeoDimension said...

hehehe... neeche label dekho kya lagaya hai... Rafat, Terrorist ;-)

neway great poem buddy... communicates the message across.

Chandan said...

Wah Rafat bhai...bhout shandaar kavita hai.. ek dam dard ko udhel dia hai.. bhout khoob

Nagesh said...

Kya baat hain Rafat,
Jai Hind.....

Amit said...

Good Rafat, Keep it up...

tarun said...

Chacha Kya Jazba dikha rahe ho
Good Keep it UP.

Sam said...

Wah wah

anoop.tiwari said...

Kya bat hai Master Ji

AP said...

sahi hia guru dev