Monday, March 7, 2011

Bharosa



Kabhi bhi apni zindegi ko kisi aur ke faisley ka mohtaaj hone mat dena
Beri jag ho, mushkil dagar ho, kabhi najayaz zulm mat sehna

yun khamosh reh kar..yun tanha dukh seh kar apne ko na yun saza do
Tum kya ho,kya kar saktey ho,apne haathon apni taqdeer badal saktey,ho nadaan duniya ko yeh bata do

Tumne jo dekhey hain wo khwab tumharey hain,
Hain utri kismat ki lakeerain jismain, wo haath tumahrey hain
Tumhari aankhon se gar tum chaho to chamkeeley sapne dekh lo
Ya phir unko pathreela kar ke apne aansu inmain sametlo


Mushkilain aur pareshaniyan bhi zindegi ka doosra naam hain
Kal suraj zaroor ayega, gar aaj andhiyari shaam hai
Aane do aandhiyan, behne do toofan ko
Machalti lehrain agar aj apni taqat par itra rahi hain
To tere bharosey ki nao bhi teri umeed ko sahil tak le ja rahi hai

Monday, January 3, 2011

Come.... Fall in Love Slideshow: Rafat’s trip from Indore, Madhya Pradesh, India to Srinagar was created by TripAdvisor. See another Srinagar slideshow. Create your own stunning free slideshow from your travel photos.

Tuesday, February 2, 2010

मेरी उम्मीद,Rafatji


एक और हार ने दिखाए हैं मुझे सपने नए...
उठने की फिर चाह जगी जब हम थक कर हम गिर गए
गैरों से शिकायत क्या करें जब साथ न दिया अपनों ने
उसको हकीकत न बना सके जो पल दिया था सपनो ने

इस दिल मैं अनजानी सी एक चाह अभी बाकि है
मंजिलें बदल गयी पर राह अभी बाकी है
मेरे होसलों को किस क़दर यह ज़िंदगी आजमा रही है
जिसकी है मुझे तलाश क्यों वो घडी मुझसे पास आ कर दूर जा रही है

नाउम्मीदी यह बता दे तू कब तक मुझ से वफ़ा रखेगी
मेरी उम्मीद आवाज़ दे रही है कभी तो गुमनामी की छाया मुझ से हटेगी

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Saturday, July 11, 2009

दस्तूर - ए दुनिया

कोई बम के धमाके से उड़ रहा है
कोई दौलत के जोर मैं उड़ रहा है
कोई अपने शौख मैं उड़ रहा है
कोई किसी के खौफ मैं उड़ रहा है

देख कर इंसानी फितरत खुदा भी हैरान है
यह बंदा किस और मुड़ रहा है

कोई ज़िंदगी गुजरने के लिए पी रहा है
तो कोई खुद को मारने के लिए पी रहा है
किसी के पास ज्यादा है इसलिए लुटा रहा है
किसी के पास कम है इसलिए जुटा रहा है

कोई नींद को खरीद कर सो रहा है
कोई पलभर नींद लेने को रो रहा है
कही किसी को शोहरत चूम रही है
तो कहीं किसी के आगे पीछे गुमनामी घूम रही है

कही किसी की दुनिया खुशियों से हसीन है
तो कही किसी की दुनिया एकदम ग़मगीन हैं
एक कमरे मैं कही किसी की ज़िंदगी गुज़र जाती है
तो कही महलों मैं किसी की आहट भी नहीं आती है

कही कोई किसी के प्यार से परेशान है
तो कही कोई अचानक मिली बेवफाई से हैरान है
कोई किसी के चमन को उजाड़ रहा है
तो कोई किसी की वीरानियों को सवार रहा है

शायद दुनिया का येही दस्तूर है ....
कोई गम की चादर ओढ़ के भी सो रहा है
तो किसी से ग़म भी कौसों दूर है
कहीं पे अँधेरा ज्यादा है ...तो कही पे बेंतेहा नूर है

शायद दुनिया का येही दस्तूर है ....शायद दुनिया का येही दस्तूर है ....

द्वारा रफत : 9826219196

Tuesday, June 9, 2009

जिन्दगी का सफ़र

ज़िन्दगी ने ली है नयी करवट, नए सफ़र का यह आगाज़ है
आँखों मैं अनजाने सपने,कही से आवाज़ देती एक पहचानी सी आवाज़ है

कोई आ रहा है चुपके से ज़िन्दगी मैं मेरे.....
बाटने सारी खुशियाँ और गम

मेरी हसी मैं उसकी आवाज़ होगी,
उसके आंसुओं मैं मेरी आह होगी
काँटों और फूलों से सजी ज़िन्दगी की राह होगी,
इस राह मैं तनहा नहीं, कोई तो मेरी हमराह होगी

किसी के साथ होने का मीठा सा एहसास होगा
संजीदा सी इस ज़िन्दगी मैं अब बहका हुआ सा अंदाज़ होगा
उसकी आँखों से देखूँगा अब अपने ख्वाब सारे
उसके बिना अधूरे होंगे,ज़िन्दगी के सारे नज़रे

दूर होकर भी दिल के पास है वो
पहली बारिश का एहसास है वो
ज़िन्दगी की किताब का पहला अल्फाज़ है वो
कभी देखा था मैंने जो,वो हकीक़त बनता खवाब है वो

ज़िन्दगी ने ली है नयी करवट, नए सफ़र का यह आगाज़ है
आँखों मैं अनजाने सपने,कही से आवाज़ देती एक पहचानी सी आवाज़ है
द्वारा रफत 09826219196

Saturday, February 21, 2009

तन्हाई



कुछ इस तरह शुरू हुआ मेरी खाव्हिशों का सिलसिला
जितना ज्यादा चाहा मैंने, उतना ही कम मिला
तन्हाई मैं तेरी वफाओं का काइल हूँ
साथ न छोडा तुने,चाहे मैं तन्हा चला या साथ चला मेरे काफिला

ज़िन्दगी एक गुमनाम राह हो गयी....न कोई पता है न कोई मंजिल
चारों और तन्हाइयों का समंदर है..न कोई ठिकाना.. न कोई साहिल
सहमी हुई सी ज़िन्दगी और अनकहे जज़्बात है
सियाह अंधेरों पे फक्र करती यह वीरान रात है

हर लम्हा अपने अश्कों को मैं पी रहा हूँ
ज़िन्दगी तुझको मैं मर मर के जी रहा हूँ
उम्मीद का एक तारा आस्मां से टूट कर कुछ इस तरहां से खो गया
तन्हाई तुझ से मेरा ज़िन्दगी भर का रिश्ता हो गया

अनकही सी गुजारिश,बेनाम से रिश्ते,रूठे हुए से सपने
भीड़ मैं तन्हा चल रहा हूँ,पहचाने से चहरे हैं, पर कोई नहीं हैं अपने
ज़िन्दगी के बहाव मैं ऐ रफत तू कुछ इस तरहां से बह गया
किसी और का ख्वाब तेरा हो गया.. और तेरा ख्वाब ख्वाब ही रह गया

द्वारा रफत : 9826219196

काइल = फेन, मुरीद | काफिला = झुंड, भीड़ | साहिल = किनारा | सियाह = काली, अँधेरी | फक्र = घमंड

Friday, November 28, 2008

Mumbai Terrorists

वो देखो आतंकवादी जा रहा है
दुनिया को अपने खौफ से सता रहा है
इंसानियत को बडे चाव से चबा रहा है
वो देखो आतंकवादी जा रहा है

मासूमों के खून से रोज़ नहा रहा है
अपने मज़हब की सीख को बदलता जा रहा है
माओं से बेटे, बहनों से भाई, और ग़रीब से रोटी छीनता चला जा रहा है
वो देखो आतंकवादी जा रहा है

अधजली लाशों..बिखरी इमारतों और अनाथ बच्चों के सवालों से कतरा रहा है
खुदा का नाम ले कर खुदा से ही दूर होता जा रहा है
अपनी कायरता को बहादुरी बतला कर इतरा रहा है
वो देखो आतंकवादी जा रहा है

कभी तू भी मासूम था कभी तेरे सीने मैं भी दिल था कभी तू भी इंसान था
अब क्यों हैवान बनता जा रहा है
शायद तू भूल गया है तेरी भी मा है,तेरी भी बेहेन है , तू भी किसी का बेटा है
अपने कामों से क्यों उन्हें शर्मसार करता जा रहा है
वो देखो आतंकवादी जा रहा है

बहाए हुए खून के एक एक कतरे का जवाब देना होगा
तेरे कर्मों का तुझे हिसाब देना होगा
क्यों तू यह भूलता जा रहा है
वो देखो आतंकवादी जा रहा है

याद रख तेरे ज़ुल्मों की ताक़त हमरे होंसलों से बहुत कम है
तेरे आकाओं को पलभर मैं खाकसार करने का हम मैं दम है
समझ जाओ...बडे प्यार से एक हिन्दुस्तानी तुमको समझा रहा है
वो देखो आतंकवादी जा रहा है

द्वारा रफत : 9826219196